सुकून है I
सुकून है I
हाँ आज बात हुए अरसा हुआ
फिर बी सुकून है I
हाँ आज मिले उस्से एक जमाना हुआ
फिर बी सुकून है I
हाँ बीते कई दिन बिना देखें
उस मुस्कुराते नीलम से चेहरे को I
उस खिलखिलाती हँसी को I
हाँ गुजरी हे कई राते यादों में तेरी I
मेरी चुप्पी को गुरुर न समजना
हमारी तो आदत थी रह देखने की
बस तुम गई और साथ में आदत भी I
किसी के आने या जाने की
मोहताज थोडी है जिन्दगी
हमे तो अपनी खुददारी पर ही सुकुन है ।
हम जेसे थे वेसे ही हे अब
क्यूंकि अब नहीं किसीका मुन्तजिर I
तब भी सुकून है I
-आकाश रावल



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