लम्हे उस्स ज़ेह्न्दगी के |
लम्हे जिनमे खोने की आदत
सी हो गई है मुजहे |
की जिनको फिरसे पाने का
मन किया है मुजहे |
की जिनमें फिर से डूब ने की तमन्ना हुई है मुजहे |
हाँ !! ये वोही लमहे हें
जिनमे में जिया करता था (सही मायनो में |)
हाँ !! ये वोही लमहे हें
जिनमे में सपने देखता था | (दिन क उजालों में, अँधेरी रातों में | )
ये वो लम्हे है जिनमे में
किसीसे प्यार करता था | (अपने पूरे होशोअवाज़ में | )
ये वो लम्हे है जिनमे
किसीकी खुशबू का अहेसास था | (शायद किसीके हुस्न का भी | )
हाँ !! ये वोही लमहे हें
जिनमे में तुम्हारी इबादत करता था | ( सिर्फ तुम्हारी !! )
और आज ,
ना वो ज़ेह्न्दगी | ना वो
लम्हे |
बस बची हे तो उन् दिलकश
लम्हों की हसीं यादें |



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